Thursday, August 30, 2018

हेबियस कॉरपस या बंदी प्रत्यक्षीकरण

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 226 में हेबियस कॉरपस का ज़िक्र किया गया है. यह एक लैटिन शब्द है जिसका अर्थ होता है कि "आपके पास शरीर है."
अगर किसी व्यक्ति को ग़लत तरीके से गिरफ़्तार किया गया हो, उसे हिरासत में अवैध तरीके से रखा गया हो और 24 घंटे के भीतर उसे कोर्ट में प्रस्तुत नहीं किया गया हो तो गिरफ़्तार शख़्स का कोई नजदीकी दोस्त या परिवार का सदस्य कोर्ट में हेबियस कॉरपस की याचिका डाल सकता है.
याचिका संवैधानिक कोर्ट, हाई कोर्ट या फिर सुप्रीम कोर्ट में डाली जा सकती है. इस पर सुनवाई उसी दिन किया जा सकता है, जिस दिन यह याचिका लगाई गई हो. या फिर ज़रूरत पड़ने पर जज के घर पर भी की जा सकती है.
ग़ैर-क़ानूनी गतिविधियां क़ानून साल 1962 में देश की संप्रुभता और एकता की रक्षा करने के लिए बनाया गया था. इसे 2004 के बाद कई बार लागू किया गया है.
चरमपंथी या ग़ैर-क़ानूनी गतिविधियों को समर्थन देने की आशंका में इस क़ानून के तहत बिना गिरफ़्तारी वॉरंट के किसी को हिरासत में लिया जा सकता है. sex
अगर सरकार यह समझती है कि व्यक्ति का संबंध किसी चरमपंथी संगठन या प्रतिबंधित संस्था से है तो इस क़ानून के तहत कार्रवाई की जा सकती है.
इस क़ानून के तहत सामान की ज़ब्ती की जा सकती है. इस विशेष क़ानून के तहत पुलिस को छह महीने के भीतर आरोप पत्र दाखिल करना होता है जबकि सामान्य क़ानून के तहत आरोप पत्र तीन महीने के भीतर दाखिल करना ज़रूरी होता है.
इस क़ानून के तहत जमानत मिलना कठिन होता है.
ये किसी फ़िल्म का डायलॉग नहीं बल्कि देवभूमि कहे जाने वाले हिमाचल प्रदेश में बढ़ते नशे की लत के आदी हो गए एक नौजवान राजू (बदला हुआ नाम) की कहानी है.
सफ़ेद दिखने वाला पाउडर, जिसके एक ग्राम की क़ीमत क़रीब 6000 रुपये है. सोने से भी मंहगा बिकने वाला ये नशा चिट्टा कहलाता है.
इसकी तस्दीक खुद हिमाचल प्रदेश के डीजीपी सीता राम मरढ़ी ने बीबीसी से की, "नशे के सौदागरों के लिए ये पैसे कमाने का सबसे आसान धंधा बन गया है."
इसका असर हिमाचल प्रदेश की नई नस्ल के ऊपर दिखने लगा है. जैसा कि राजू के शब्दों से जाहिर होता है, "इसकी आदत पड़ गई है. नहीं मिलने पर नींद नहीं आती है."
शिमला मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल और मनोचिकित्सक डॉक्टर रवि शर्मा बताते हैं, "किसी भी नशे के सेवन के नुक़सान अलग-अलग तरह के होते हैं."
"लेकिन चिट्टा का एक ऐसा नशा है जिसका एक या दो बार सेवन करने के बाद, कोई भी इसका आदी हो जाता है. और इसे छुड़ाने के लिए कई बार मरीज़ को भर्ती भी करना पड़ता है."
सफेद रंग के पाउडर सा दिखने वाला ये नशा एक तरह का सिंथेटिक ड्रग्स है. हेरोइन के साथ कुछ केमिकल्स मिलाकर ये ड्रग्स तैयार किया जाता है.
हाल ही में हिमाचल के अलग-अलग जगहों से गिरफ़्तार हुए नशे के सौदागरों से ये बात सामने आई है कि कैसे वो युवाओं और बच्चों को अपने जाल में फंसाते हैं.
राजू ने भी इसके बारे में बताया, "जो नशा करते हैं, वही इसे आगे बढ़ा रहे हैं. उन्हें इतना पैसा घर से नहीं मिलता तो वे इसका बिज़नेस करने लगते हैं. ताकि खुद का काम भी चल जाए और लोगों से थोड़ा पैसा भी मिल जाए."

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