Monday, May 27, 2019

चर्चा में रहे लोगों से बातचीत पर आधारित साप्ताहिक कार्यक्रम

इसीलिए रूस कुछ तो इंटरनेट के बुनियादी ढांचे और कुछ आईपी एड्रेस को क़ाबू कर के इंटरनेट की हदबंदी करना चाहता है. हर कंप्यूटर तक इंटरनेट से क्या और कितनी जानकारी पहुंचे, इस पर कुछ हद तक रूस की सरकार ने नियंत्रण पा लिया है.
रूस की सरकार ने अपने नागरिकों के इंटरनेट इस्तेमाल पर नज़र रखने के लिए हर वेबसाइट और इंटरनेट सेवा का लोकल आईपी एड्रेस बनाने का फ़रमान जारी किया है. मतलब ये कि इंटरनेट के ज़रिए रूस तक पहुंचने वाली हर कंपनी या वेबसाइट को रूस का डेटा रूस में ही रखना होगा. हर वेबसाइट का एक लोकल आईपी एड्रेस होगा जो सिर्फ़ रूस में देखा जा सकेगा. इसके अलावा रूस की कोशिश ये है कि लोग इंटरनेट पर गूगल टाइप करें, तो रूसी गूगल यानी यांडेक्स की वेबसाइट खुले. फ़ेसबुक तलाशें तो रूसी सोशल नेटवर्क वीके की वेबसाइट खुले.
इसके लिए रूस ने कई क़ानून बनाएं हैं. जो कंपनियां रूस के क़ानून नहीं मानतीं, उस पर रूस में पाबंदी लग जाती है.
अगर रूस अपने इरादों में कामयाब होता है तो रूस का इंटरनेट बाक़ी दुनिया से अलग होगा. रूस में जब इंटरनेट खोला जाएगा, तो वही चीज़ें दिखेंगी, जिन वेबसाइट के सर्वर रूस में होंगे. अगर, फ़ेसबुक का लोकल सर्वर रूस में नहीं होगा, तो रूस में फ़ेसबुक की वेबसाइट नहीं खुलेगी.
रूस के इस क़दम का कई बड़ी कंपनियों पर असर पड़ना तय है.
बहुत से छोटे देश भी इंटरनेट पर लगाम लगाना चाहते हैं. मगर, उनके पास रूस और चीन जितने पैसे भी नहीं हैं और तकनीक भी नहीं. ये लोग रूस और चीन की मदद से अपने यहां इंटरनेट के इस्तेमाल पर शिकंजा कस सकते हैं. ऐसा हुआ तो दुनिया दो गुटों में बंटनी तय है. एक तो वो देश जहां इंटरनेट पाबंदियों से परे होगा. दूसरा रूस और चीन जैसे देश जिनका इंटरनेट पर नियंत्रण होगा.
भारत और इज़राइल जैसे कई देश ऐसे भी हैं जो इंटरनेट पर पूरी तरह नहीं तो, कुछ हद तक पाबंदी चाहते हैं. इनमें यूक्रेन, सिंगापुर, ब्राज़ील भी हैं. हर देश अपने यहां इंटरनेट पर किसी न किसी तरह के नियंत्रण की बात करता है.
2017 में रूस ने एलान किया था कि वो ब्रिक्स देशों यानी भारत, ब्राज़ील, दक्षिण अफ्रीका और चीन के साथ मिलकर इंटरनेट को बाहरी देशों के असर से बचाने का काम करेगा. हालांकि ब्राज़ील और भारत ने इस कार्यक्रम पर बहुत उत्साह नहीं दिखाया. पर, चीन और रूस लगातार इंटरनेट को नियंत्रित करने की मुहिम में जुटे हैं.
चीन का बीआरआई प्रोजेक्ट यूं तो एशिया को यूरोप और अफ्रीका से जोड़ने का प्रोजेक्ट है. पर इसके लिए अफ्रीकी देशों से लेकर एशियाई देशों तक संचार सेवाओं का जाल विकसित किया जा रहा है. तंज़ानिया, डिजीबूती, ज़िम्बाब्वे और ताजिकिस्तान जैसे देशों में चीन 80 से ज़्यादा संचार प्रोजेक्ट विकसित कर रहा है. यानी चीन इंटरनेट के बरक्स संचार का अपना नेटवर्क पूरी दुनिया में खड़ा कर रहा है.
तकनीकी जानकार सिम टैक कहते हैं कि चीन का बीआरआई प्रोजेक्ट, पश्चिमी देशों के नियंत्रण वाले इंटरनेट के लिए चुनौती बनने जा रहा है. बहुत से छोटे देश इस पर निर्भर होने जा रहे हैं. उनकी दिलचस्पी इंटरनेट को क़ाबू करने में है.
इंटरनेट की आज़ादी की वक़ालत करने वाली एक्सपर्ट मारिया फैरेल कहती हैं कि चीन ने बीआरआई के ज़रिए इंटरनेट का सिर्फ़ बुनियादी ढांचा नहीं दिया है. बल्कि वो इंटरनेट को नियंत्रित करने की ट्रेनिंग से लेकर इससे जुड़े क़ानून तक का मॉडल तमाम देशों तक पहुंचा रहे हैं. तंज़ानिया, ज़िम्बाब्वे, डिजीबूती और युगांडा जैसे देश ऐसा इंटरनेट नहीं चाहते, जो गूगल और फ़ेसबुक को बेरोक-टोक उनके देश में घुसने दे. इसीलिए वो चीन के क़रीब जा रहे हैं. उसकी तकनीक अपना रहे हैं.
जानकार आशंका जता रहे हैं कि आगे चलकर इंटरनेट दो हिस्सों में बंट सकता है. एक तो पश्चिमी देशों की खुली इंटरनेट दुनिया. और दूसरी तरफ़ रूस और चीन जैसी पाबंदियों वाला इंटरनेट.
पिछले दिनों बहुत से पश्चिमी देशों ने भी इंटरनेट के खुलेपन का नुक़सान उठाया है. रूस ने अमरीकी चुनावों को इंटरनेट के ज़रिए प्रभावित करने की कोशिश की. कई और देशों ने भी चीन के हैकर्स और रूस के हैकर्स का हमला झेला है.
ब्रिटेन ने तो मजबूरन इंटरनेट पर निगाह रखने के लिए ब्रिटिश ऑनलाइन हार्म्स बिल संसद में पेश किया है. ये क़ानून भी इंटरनेट पर निगाह रखने के रूसी इरादे से मिलता-जुलता है.
ब्रिटेन का मानना है कि पोर्न साइट, नस्लवादी हिंसा को बढ़ावा देने वाली वेबसाइट और ट्रोलिंग रोकने के लिए ये क़ानून ज़रूरी है.
फ़ेसबुक और गूगल जैसी कंपनियां तो पहले से ही इंटरनेट पर नियंत्रण रखने की कई सरकारों की मांग के आगे झुकती आई हैं. चीन में गूगल का दूसरा रूप है और भारत में दूसरा. यही हाल फ़ेसबुक के अमरीकी और भारतीय वर्ज़न का है.
कुल मिलाकर वो आज़ाद इंटरनेट, जिसका ख़्वाब इसकी शुरुआत करने वालों ने देखा था, वो अपनी आख़िरी सांसें गिन रहा है.

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